बुधवार, 19 जनवरी 2011

खुले आम बिक रहा अंधविश्वास

टेलीविजन पर एक विज्ञापन पिछले दिनों देखा। व्यक्ति को नजर लगने से बचाने का यंत्र, गले में डिजाइनर लॉकेट के रूप में पहने जाने वाला इस विज्ञापन के माध्यम से बेचा जा रहा है। सामान्य विज्ञापनों की तरह यह विज्ञापन चंद सेकंड का भी नहीं है। यह लम्बा चलता है लगभग आधे घंटे तक। आधुनिक वेशभूषा, मेकअप, केशसज्जा वाली एक अल्ट्रा मॉडर्न लड़की इसकी सूत्रधार है। विज्ञापन में एक दृश्य बताता है कि एक पड़ोसन दूसरी पड़ोसन की नन्ही बच्ची का लाड़-दुलार करती है, उसकी तारीफ करती है उससे बच्ची को नजर लग जाती है और वह बीमार हो जाती है। नजर लगने के दृश्य में पड़ोसन की आँख से किरणें निकलकर बच्ची पर पड़ते हुए बताई जाती है। चूँकि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में स्पेशल इफेक्ट्‍स के जरिए ऐसा भ्रम रचना संभव है। इसी विज्ञापन के एक दृश्य मेंब ताया जाता है कि एक महिला का नया घर बना है। महिला की चाची सास आती है और भवन की और महिला के पति की तारीफ करती है, अपने स्वयं के पति को निठल्ला बताते हुए और यह क्या? पड़ोसन की आँखों से बुरी नजर किरणों के रूप में निकलती है और भवन वाली महिला के पति को नजर लग जाती है। इसका उपाय क्या? पौने तीन हजार रुपए कीमत वाला विज्ञापित लॉकेट धारण करो तो लॉकेट व्यक्ति के आसपास प्रकाश का एक सुरक्षा चक्र बनाएगा और आँखों से निकलने वाली बुरी किरण उससे टकराकर लौट जाएगी। सिर्फ पौने तीन हजार में नजर का काम तमाम! लगे हाथों विज्ञापनकर्ता यह बताना भी नहीं भूलते कि यह लॉकेट इतना गुणी है कि पौने तीन हजार में तो बहुत सस्ता है।

चूँकि दृश्य-श्रव्य माध्यम से यह झूठ और अंधविश्वास बताया जा रहा है अत: नासमझ मनों पर यह और ज्यादा असर डाल सकता है। वैसे ही अंधविश्वास प्रगति की राह में रोड़ा बना हुआ है, ऊपर से प्रचार माध्यम अपनी नैतिक जिम्मेदारियाँ भूलकर अंधविश्वास बढ़ाने का काम कर रहे है, यह बहुत बुरा और विरोध योग्य है।

स्त्री छवि के नाते भी देखा जाए तो पिछड़े, अंधविश्वासी पात्रों को बताने के लिए पड़ोसन और चाची सास जैसे महिला पात्रों का उपयोग किया गया है। विशेष तौर पर स्त्रियों को ही संकीर्ण और ईर्ष्यालु बताना एक पूर्वाग्रह ग्रसित प्रवृत्ति है। किसी भी तरह के मीडिया का काम गलत चीजों का भंडाफोड़कर, बुराइयों के प्रति आगाह करना, भ्रमों का खुलासा करना है, अंधविश्वास को बढ़ाना नहीं। ताकि एक स्वस्थ समाज बनाने में मीडिया की भूमिका रहे।

- निर्मला भुराड़िया

1 टिप्पणी:

  1. सही कहा निर्मला जी, देर रात को कई चैनल्स पर टीवी शॉपी में कई ऐसे बेतुके ऐड दिखते हैं... कई बार हेमामालिनी को ऐसी अगरबत्ती बेचते देखा है जिससे नवग्रह शांत होते हैं.. और आपकी तकदीर बदल जाती है... अब इतने धुंधार ऐड आएंगे तो लोगों पर कुछ ना कुछ फर्क तो पड़ेगा ही.

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