मेरे व्यक्तिगत मेल पर एक युवती का पत्र आया है, जिसके माध्यम से उसने अपनी एक उलझन व्यक्त की है और उलझन का समाधान भी चाहा है। उसके पत्र का सार यह है कि उसकी सगाई हो चुकी है, वह एपिलेप्सी यानी मिर्गी की मरीज है। मिर्गी बिलकुल नियंत्रण में है, बस नियमित दवा लेनी होती है। मगर उसे कोई बीमारी है, यह बात भावी पति व उनके परिवार को पता नहीं है। लड़की के परिवारजनों, परिचितों, मित्रों का कहना है कि शादी तक बीमारी की बात छुपाए रखना चाहिए नहीं तो सगाई टूट जाएगी! शादी के बाद बता दें कि माइग्रेन की दवा चल रही है या पूरी बात भी पता चल जाए तो िफर क्या शादी के बाद तो वो लोग समझौता कर ही लेंगे!लड़की रिश्तेदारों के इस सुझाव से सहमत नहीं है, मगर शादी करने की इच्छा है अत: थोड़ी डगमग भी है। जहाँ तक सलाह का प्रश्न है तो उसे यही सलाह दी जा सकती है कि वह अपनी आत्मा की आवाज सुने, लालची मन की नहीं और नासमझ रिश्तेदारों की तो बिलकुल भी नहीं, क्योंकि शादी की बुनियाद ही विश्वास पर बनती है, सही तथ्य छुपाकर किसी से जीवनभर का गठबंधन करना छल की श्रेणी में आएगा। यदि वह लड़का सच जानकर भी शादी करना चाहता है तभी वह उपयुक्त पात्र है अन्यथा नहीं। नहीं तो जीवन की राह में कोई और आएगा जो आपको आप जो भी है उसके सहित प्रेम करेगा। क्योंकि प्यार में शर्त, समझौता, सौदा या धोखा कुछ भी ठीक नहीं। जहाँ तक मिर्गी का सवाल है, कोई भी समझदार आदमी समझता है कि अब यह बीमारी कोई कलंक नहीं मानी जाती, बस यह जीवन के समांतर चलने वाली एक उलझन भर है जिससे जू्झते हुए बड़े-बड़े खिलाड़ी तक सफल जीवन जी रहे हैं और खेल जैसी शारीरिक गतिविधि में करियर भी बना रहे हैं। खैर हम मिर्गी की बात एक ओर रखकर इस लड़की के पत्र के बहाने एक अन्य प्रवृत्ति पर चर्चा करें। भारतीयों का एक बड़ा प्रतिशत अरेन्ज्ड शादियाँ करता है। उसमें कुछ मामलों में आय गलत बताने, बीमारी छुपाने जैसी बातों के अलावा अनगिनत छोटे-मोटे छल िकए जाते हैं, जैसे हाइट एक इंच ज्यादा बता देना (कोई इंच टेप से थोड़े नापने वाले हैं!) लड़की की डिग्री गलत बता देना (बस ग्रेजुएशन का फाइनल ही तो नहीं किया है!), दूसरे का बनाया व्यंजन लड़की ने बनाया बता देना (अपने घर जाकर रोटी जलाएगी तब देखेंगे, बता देंगे किचन में पाँव नहीं धरा!), छोटी को दिखाया बड़ी की शादी कर दी (सगाई पश्चात मिलने-जुलने के प्रोग्राम ने इस पर थोड़ी रोक लगाई है)।
ठीक है व्यक्ति उस दिन अपने सर्वश्रेष्ठ का प्रदर्शन करना चाहता है, मगर श्रेष्ठ दिखने के लिए झूठ और उधार का सहारा लेना लिजलिजेपन को जन्म देता है। विवाहरूपी कांट्रेक्ट के सील हो जाने तक हर जानकारी गलत बताना या जानबूझकर अपने जीवन की महत्वपूर्ण घटनाएँ छुपाना रिश्ते की बुनियाद ही झूठ पर रखना होगा। सच न बताना छल की श्रेणी में भी आएगा, जिसका पता चलने पर कड़ुवाहट स्वाभाविक है, जबकि सच बताने पर ऐसे ही दरियादिल व्यक्ति से रिश्ता बनने की संभावना होती है साफगोई जिसके दिल को छू जाती हो, जो सच बता देने की हिम्मत की कद्र करना जानता हो। प्रेम भी वही कर सकता है, जो आपको आपकी कमियों सहित चाहता हो, वर्ना.... कम्प्रोमाइज तो है ही पर उसमें क्या दम है? रिश्ता घसीटने के लिए रिश्ता जोड़ने का क्या मतलब?
सच कह देने में व्यक्ति की आजादी भी है। स्वतंत्र किस्म के व्यक्ति अपने सही-गलत दोनों का उत्तरदायित्व खुद लेते हैं। झूठ गुलामी है, जिसे आपने किसी अन्य को प्रसन्न करने के लिए बोला। झूठ में हर वक्त का भय है, पोल खुलने का भय, मीठी परत के कभी भी सरक जाने का भय। आप साफगो हैं तो आप आजाद और मुक्त हैं। परिणाम आप उसी वक्त भुगतने को तैयार हैं, तो परिणाम का भय
पाले रखने का तनाव नहीं। अत: बता देने में मुक्ति है, छुपाने में बोझ। पारदर्शिता इसीलिए अच्छी है।
- निर्मला भुराड़िया
http://www.nirmalabhuradia.com/





